लिलियम लाहुल घाटी की व्यवसायिक पुष्प
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Abstract
फूलों का सम्बन्ध मानव के साथ आदिकाल से रहा है। फूल सौदर्यए प्रेमए अनुराग की सघन अभिव्यक्ति एवं प्रकृति का सुन्दरतम रूप है। फूल का स्मरण आते ही हमारी कोमल भावनाएं प्रफुल्लित हो जाती है। मनुश्य चाहे कितने भी दुख या तनाव मे क्यों न होए फूलों की चमकए खुषबू व ताजगी मन को स्वतः ही मोह लेती है। इन्हे श्रृगारए धार्मिक अनुश्ठानोंए त्योहारों व प्रतिदिन के उत्सवों मे प्रयोग किया जाता हैए वर्तमान में फूलों की खेती आर्थिक रूप में लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित हो गई है। फूलों की व्यवसायिक खेती को मुख्यतः तीन उद्देष्यो के लिए किया जाता है। पहली प्रकार की खेती में उत्पादक का उद्देष्य फूलों की खुदरा बिक्री के लिए धार्मिक कार्यो अथवा श्रृगार के रुप में प्रयुक्त होने वाले गजराए माला इत्यादि के लिए आपूर्ति करना है जिसमें बेलाए गेंदाए गुलाबए तथा चमेंली इत्यादि की खेती सम्मिलित है। दूसरी श्रेणी के फूलों की खेती गुलदस्तेए बटनहोलए कर्तित फूलों इत्यादि के लिए की जाती है जिसमें लिलियमए ग्लेडियोलसए कारनेषनए गुलाबए जरबेरा व गुलदाउदी इत्यादि उगाये जाते है । तीसरे प्रकार की खेती सुगन्धित फूलों से इत्र तथा अन्य प्रकार के उत्पाद तैयार करने के लिए की जाती है जिनका प्रयोग खाद्य और प्रसाधन सामग्री के निर्माण में किया जाता है। इसमें गुलाबए खसए चमेलीए लैवेन्डर तथा जिरेनियम आदि प्रमुख है ।
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1.
धीमानम, सुमनर, कुमारर, प्रकाषच, गुलेरियाम. लिलियम लाहुल घाटी की व्यवसायिक पुष्प. ANSDN [Internet]. 24Jul.2014 [cited 4Feb.2026];2(01):206-9. Available from: https://anushandhan.in/index.php/ANSDHN/article/view/1015
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Review Article