आओ संवारे जैवविविधता
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Abstract
जैवविविधता और इसके अन्य अंग मानव के अस्तित्व के आधार हैं। इस जैवविविधता के कारण ही हमें भोजन, ऊर्जा, दवाएं, परितांत्रित झोत, वैज्ञानिक तथ्यों की जानकारी और छह अरब से अधिक लोगों को सांस्कृतिक आधार मिलता है। जैवविविधता नष्ट होने से हमारे समाज या आर्थिक तंत्र पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इसके सैंकड़ों उदाहरण उपस्थित हैं, कितने विस्थापन हो रहें हैं, कितने बीमार पड़ रहें हैं, कितनी भुखमरी बढ़ रही है| संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार सन् 2020 तक विश्वभर में करीब पाँच करोड़ पर्यावरण विस्थापित होंगे| और यह इसलिए विस्थापित हॉगे क्योंकि जलवायु परिवर्तन के कारण खाना-पानी मिलना दुरूह हो जाएगा, यानी जैवविविधता का नाश होगा जिससे विस्थापन की प्रवृत्ति और बढ़ेगी। सच्चाई यह है कि गरीबी, भूख और अधिकतर अन्य पीड़ाएं इस जैवविविधता की तबाही का ही परिणाम हैं।
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1.
गुप्तान. आओ संवारे जैवविविधता. ANSDN [Internet]. 24Jul.2013 [cited 4Feb.2026];1(01):145-7. Available from: https://anushandhan.in/index.php/ANSDHN/article/view/1622
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