कस्तूरी मृग

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सी0 पी0 सिंह

Abstract

कस्तूरी मृग हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाने वाला एक दुर्लभ प्राणी है| यह समखुरयुकत स्तनधारियों का समूह है। यह पशु मृगों के अंखुलेटा कूल की मॉस्क्रस मॉस्किफ़ेरस नामक प्रजाति का जुगाली करने वाला श्रृंगरहित चौपाया है। कस्तूरी मृग की प्रमुखत: चार प्रजातियाँ चीन, रूस, नेपाल एवं भारत के हिमालयी क्षेत्रों में पायी जाती है| यह उच्च हिमालयी क्षेत्रों में 2500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में निवास करता है| कस्तूरी मृग को "हिमालयन मस्क डियर" के नाम से भी जाना जाता है| मृग प्रजाति का होने के बाद भी “कस्तूरी मृग” सामान्य मृग से अलग होता है। इसका रंग भूरा और उस पर काले मटमैले धब्बे होते हैं। 60 से 75 मिलीमीटर लम्बे दोनों दांत कैनाइन ऊपर से ठुड्डी के बाहर तक निकले रहते हैं। जिनका उपयोग यह अपनी सुरक्षा और जड़ी-बूटियों को खोदने में करता है। इसकी पिछली टांगे अगली टांगों से लम्बी होती हैं। खुर एवं नखों की बनावट इतनी छोटी, नुकीली एवं विशेष प्रकार की होती है कि बड़ी फुर्ती से भागते समय भी इसकी चारों टांगे चट्टानों के छोटे-छोटे किनारों पर टिक सकती है। खुर के नीचे खुरपोल होते हैं। इन्हीं खुरपालों की सहायता से यह बर्फ में भी आसानी से दौड़ सकते हैं। इनका प्रजनन काल प्राय: नवम्बर, दिसम्बर में होता है।

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1.
सिंहस. कस्तूरी मृग. ANSDN [Internet]. 24Jul.2013 [cited 22Mar.2026];1(01):153-4. Available from: https://anushandhan.in/index.php/ANSDHN/article/view/1624
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