जल-भण्डारण, संरक्षण तथा प्रबन्धन

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ए 0 के0 चतुर्वेदी

Abstract

जल, सृष्टि के पंच तत्वों में से एक है। ऐसी मान्यता है कि पृथ्वी पर जीवन का प्रार्दुभाव जल के द्वारा ही हुआ है। सभी जैविक क्रियाओं के लिए जल आवश्यक है। अत: जीवन के लिए जल एक आवश्यक घटक है | इसीलिए जल और जीवन का अटूट सम्बन्ध है। जल मानवीय मूलभूत आवश्यकता है। दैनिक जीवन में जल का विशेष महत्व है । जल की उपयोगिता असीमित है | जल, प्रकृति का अनूठा वरदान है। विश्व में पृथ्वी चारों ओर जल से घिरी हुयी है | पृथ्वी पर अथाह, असीमित जल उपस्थित है। विश्व में जल ही ऐसा पदार्थ है जो तीनों अवस्थाओं (ठोस, द्रव-जल, गैस-भाष) में पाया जाता है | यह एक विलक्षण घटना है | पृथ्वी पर प्रकृति द्वारा प्रदत्त जल अद्भुत वरदान है। जल विभिन्‍न स्थानों पर भिन्न मात्रा में पाया जाता है। महासागरों में 96.5% तथा महाद्वीपों पर 35% जल पाया जाता है। महाद्वीपों पर भूमिगत जल 0.97%, हिमखण्डों व शिखरों पर 474%, धरातलीय जल 0783%, वायुमण्डलीय जल 0.003%, मिट्टी में नमी 0.002% दलदल 0.00%, जैविक जल 0.004% पाया जाता है। जल का उपयोग गृहकार्य, औद्योगिक, तापविद्युत उत्पादन, जल विद्युत उत्पादन, सिंचाई, पशुपालन आदि में किया जाता है। पीने योग्य शुद्ध जल हिमखण्डों, हिमशिखरों, धरातल जल, भूमिगत जल से प्राप्त किया जाता है। जल हमारे जीवन में बहुत ही उपयोगी है। जल के बिना जीवन असम्भव है। जल के अत्यधिक दोहन से, अनुचित भण्डारण, संरक्षण एवं प्रबन्धन की कमी के कारण जल संकट उत्पन्न हो रहा है। इस कुप्रबन्धन, जनसंख्या विस्फोट तथा अत्यधिक अनसुयोजित औद्योगीकरण के कारण भी जल संकट को बढ़ावा मिल रहा है।

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How to Cite
1.
चतुर्वेदीए0. जल-भण्डारण, संरक्षण तथा प्रबन्धन. ANSDN [Internet]. 24Jul.2013 [cited 22Mar.2026];1(01):212-3. Available from: https://anushandhan.in/index.php/ANSDHN/article/view/1644
Section
Review Article