संस्कृत: एक सम्पूर्ण विज्ञान

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कुलदीपक शुक्ल

Abstract

भारत को विश्वगुरु की उपाधि मिलने का मुख्य हेतु है- भारतीय संस्कृति। इस भारतीय संस्कृति की नीव संस्कृत भाषा पर आधारित है। यह एक मिथ्या धारणा है कि यह मात्र मन्दिरों या धार्मिक रीतियों में प्रयोग करने वाली भाषा है, जब कि संस्कृत साहित्य की अपेक्षा यह पांच प्रतिशत हैं। ६५% से अधिक संस्कृत साहित्य का धर्म या पौरोहित्य कर्म से कुछ भी लेना देना नहीं है। बल्कि इसके अतिरिक्त ये भाषा-दर्शन, कानून, ज्योतिष, व्याकरण, गणित, साहित्य, संगीत, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, आदि से सम्बन्ध रखती है। वास्तव में संस्कृत मुक्त विचारकों की भाषा थी उन विचारकों ने प्रत्येक क्षेत्र में प्रश्न उठाया तथा उनके विभिन्‍न विषयों पर विस्तृत रूप से अपने ही आप उत्त्तरों को व्यक्त किया।

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1.
शुक्लक. संस्कृत: एक सम्पूर्ण विज्ञान. ANSDN [Internet]. 27Jul.2020 [cited 17Oct.2026];3(01):119-20. Available from: https://anushandhan.in/index.php/ANSDHN/article/view/1668
Section
Review Article